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जातक युग में नारी का स्थान : 0

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  जातक युग में     नारी का स्थान :   शोध निबंध , डॉ . सुनीता सिन्हा . शिक्षिका , डी ए वी , विद्यालय , बिहारशरीफ़ , नालंदा .   नारियों की स्थिति :  नारी तथा पुरुष की एकात्मक भावना में ही गृहस्थ का संसार है । गार्हस्थ निर्वाह में नारी का स्थान महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट रहा है । पुरुष तथा नारी के कर्म क्षेत्र में अनेक प्रकार की भिन्नता होते हुए भी एक के कर्म में दूसरे की सहायता को विशेष रूप से स्वीकार किया गया है । वैदिक युग में नारियों का स्थान महत्वपूर्ण तथा गौरवान्वित रहा है , किन्तु जातक युग में किन परिस्थितियों , घटनाओं और कारणों से इतना बदल गया कि नारियों को गर्हित दृष्टि से देखा जाने लगा ।   शैशव काल में नारियों का जीवन पितृ - गृह में बीतता था । हिन्दू समाज में आर्थिक सामाजिक कारणों से पुत्र की तरह पुत्री वरदान स्वरूप नहीं समझी जाती थी क्योंकि न तो ये वृद्धावस्था में पिता का भरण पोषण ही करती थी और न पैतृक...